पोलियो मुक्त भारत
आज भारत आधिकारिक रूप से पोलियो
मुक्त देश बन जाएगा | विश्व स्वास्थ्य संगठन आधिकारिक रूप से भारत को
पोलियो मुक्त देश का दर्जा 11 फरवरी को प्रदान करेगा | भारत अपनी इस उपलब्धि से दक्षिण पूर्वी ऐशीयाई
क्षेत्र में पोलियो मुक्त देश बन जाएगा | अब भारत को पोलियो
मुक्त देश प्रमाण पत्र मिलने का रास्ता साफ़ हो गया है | यह भारत की स्वास्थ्य क्षेत्र में बहुत बड़ी
उपलबब्धि है | पिछले तीन सालों में भारत में पोलियो का एक भी मामला सामने नहीं आया है | भारत ने 1980 में स्मालपोक्स(small Pox) का
जड़ से खात्मा कर दिया था, इसके बाद पोलियो दूसरी ऐसी बीमारी है
जिसे टीकाकरण के ज़रिए भारत में खत्म किया जा सका
है | 1980 के दशक में पोलियो 100 से अधिक देशों में
था |
डब्ल्यूएचओ के एक प्रवक्ता ने बताया, "यदि आयोग इस बात से संतुष्ट हो जाता है कि इस दक्षिण एशियाई क्षेत्र में कोई पोलियो वायरस नहीं है और यहां निगरानी तंत्र भी संतोषजनक है और पहले चरण के तहत जांच की सुविधाएं भी पूरी हो चुकी हैं तो डब्ल्यूएचओ की ओर से इस क्षेत्र को पोलियो मुक्त घोषित कर दिया जाएगा | " उन्होंने कहा, "भारत की उपलब्धि से पता चलता है कि यदि सही तरीके से और दृढ़ राजनीतिक इच्छा शक्ति के साथ काम किया जाए तो मौजूदा समय में पोलियो उन्मूलन की रणनीति दुनिया के कठिनतम क्षेत्रों में भी इसका ख़ात्मा कर सकती है | "
यहाँ ध्यान देने योग्य
विशेष बात यह है कि 2009 तक पूरी दुनिया के आधे से अधिक मामले भारत में ही दर्ज
होते आए हैं | 2009 में भारत में पोलियो के 741 मामले सामने आए थे
| पश्चिम बंगाल की रुखसार, भारत में
पोलियो की आखिरी शिकार थीं | यह मामला 2011 का था | सरकार इस मुहिम में हर साल एक हज़ार करोड़ रुपए खर्च करती है | भारत में पोलियो टीकाकरण के दौरान हर साल 24 लाख कार्यकर्ता और 17 लाख
कर्मचारी 17 करोड़ से ज्यादा बच्चों को पोलियो का टीका देते हैं | पोलियो के कारण मौत भी हो सकती
है | विकलांगता इसका भयावह परिणाम है,
जिसके कारण समाज में उस बच्चे को काफी कुछ सिर्फ विकलांगता के कारण सहना पड़ता है |
भारत में पोलियो खात्मे का
रास्ता आसान नहीं था | समाज में इसके बारे में कई भ्रांतियाँ फैली हुई
थी | उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में ये कहा जा रहा था कि यदि
आपने पोलियो ड्रॉप पिलाया तो आपका बच्चा नपुंसक हो जाएगा |
इन अफवाहों का काफी असर भी हुआ | इन अफवाहों के खात्मे के
लिए भारत सरकार ने सामाजिक जागरूकता का कार्यक्रम भी चलाया जिसका व्यापक असर समाज
में दिखाई दिया | भारत के सामने कई चुनौतियाँ थी | मसलन, भारत के पास संसाधनों की कमी थी और स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में भारत
बहुत पीछे था | भारत ने इन सभी कठिनाइयों के बावजूद अपने
लक्ष्य को हासिल किया | इस
मामले में यूनिसेफ के भारत स्थित केंद्र के पोलियो प्रमुख निकोल ड्यूश कहते हैं, "इन गतिरोधों के बावजूद भारत ने दुनिया को ये दिखा दिया कि ऐसी बीमारियों
को कैसे जीता जा सकता है |" लेकिन आज भी
21वीं सदी के भारत में साफ़- सफाई की समस्या और भी कई भयानक रोग जैसे डायरिया, हैजा, कुपोषण से लाखों बच्चे हर साल मरते हैं | आज भी
भारत में कई ऐसी ही बीमारियाँ हैं जिनसे भारत को लड़ने की जरूरत है | बेशक, भारत के
लिए ये एक बहुत बड़ी उपलबब्धि है ,लेकिन सवाल यहाँ ये उठता है कि भारत स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में आज
कहाँ है ? लोगों को स्वास्थ्य सेवाएँ मिल पा रहीं हैं या
नहीं | अगर इस मामले में भारत की स्थिति को देखा जाए तो भारत
इस मामले में आज भी बहुत पीछे है | कुपोषण के मामले में हम
अपने पड़ोसी देशों से भी आगें हैं | दूसरी महत्वपूर्ण सवाल ये
है कि स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता की बात की जाए तो वो सिर्फ कुछ वर्ग तक ही सीमित रह गयी है | गरीब अभी भी स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में बहुत पीछे हैं | इस मामले में प्रणव मुखर्जी भी अपनी चिंता प्रकट कर चुकें हैं |
हालांकि, भारत की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है | भारत को अभी भी पड़ोसी देशों से पोलियो के मामले आने का खतरा है | इसके लिए भारत ने सीमा पर पोलियो कैंप लगा रखे हैं | पाकिस्तान, अफगानिस्तान में अभी हाल-फिलहाल में पोलियो के कुछ मामले सामने आए हैं | भारत सरकार को इस उपलब्धि को सकारात्मक लेते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में अभी भी बहुत कुछ करना है | जिस तत्परता से पोलियो मिटाने के लिए काम किया गया, वही तत्परता स्वास्थ्य के अन्य क्षेत्रों में भी दिखाई देने की जरूरत है |
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