Monday, December 16, 2013

मैं उड़ना चाहती हूँ, मैं नित नयी उचाईयों को छूना चाहती हूँ |


आज 16 दिसंबर को बीते हुए पूरा एक साल हो चुका है |आज महिलाओं के अधिकारों की मांग हर जगह उठ रही है जो कि हमारे विकास के लिए बहुत जरूरी है | क्योंकि आधी आबादी तो इन्हीं की है |अगर इनका विकास होगा तो पूरे समाज और राष्ट्र का विकास होगा | उन्हीं के लिए समर्पित यह मेरी रचना -


मैं उड़ना चाहती हूँ,
मैं नित नयी उचाईयों को छूना चाहती हूँ 
मैं कुछ कर दिखाना चाहती हूँ 
मैं आसमां में झूम जाना चाहती हूँ 
जालिमों, ये मत समझना, न ही भ्रम रखना 
कि तुम्हारे डराने से मैं डर जाऊँगी 
मैं लड़ूँगी , झूझुंगी, आगें बढ़ूँगी
मैं कर के दिखाऊँगी 
मैं समाज में अपना स्थान पाकर रहूँगी |



आज 16 दिसंबर को बीते हुए पूरा एक साल हो चुका है | क्या कुछ बदला इस एक साल में? दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म घटना के चारों आरोपियों (पवन गुप्ता, मुकेश सिंह, विनय शर्मा और अक्षय सिंह ) को फांसी की सजा सुनाई गयी | आरोपियों को हत्या, आपराधिक षड्यंत्र, अपहरण,सामूहिक बलात्कार, अप्राक्रतिक यौन संबंध, हत्या का प्रयास, सबूत नष्ट करने के धाराओं के तहत फांसी की सजा मिली है | पीड़ित छात्रा का दोस्त अवनीन्द्र पांडे इस घटना का एक मात्र चस्मदीद गवाह है, जो कि अभी तक उस दर्दनाक घटना से उबर नहीं पाया है |
16 दिसम्बर को हुई सामूहिक दुष्कर्म की वीभत्स घटना ने सम्पूर्ण भारत को हिलाकर रख दिया था | दुष्कर्म के बाद उसकी मौत तथा उसकी मौत के बाद सरकार के प्रति लोगों का बढ़ता गुस्सा यह दिखा रहा था कि पूरा देश एक कड़े नियमों की मांग कर रहा था | इस पर बहुत वाद-विवाद हुआ तथा अंत में जे.एस. वर्मा की सिफ़ारिशों को स्वीकार किया गया । नियमों में संशोधन कर राष्ट्रीय महिला सुरक्षा अधिनियम बनाया गया | उसके बाद बजट में निर्भया फ़ंड की घोषणा की गयी लेकिन इतने सब से देश कहाँ शांत होने वाला था | 
राम सिंह को इस मामले में मुख्य संदिग्ध बताया गया था. वे इस वर्ष मार्च में तिहाड़ जेल में मृत पाए गए थे | मुकेश, राम सिंह का छोटा भाई था. वे अपने भाई के साथ रहता था और कभी-कभी बतौर बस ड्रा्इवर और क्लीनर काम करता था | 20 साल के विनय शर्मा एक फिटनेस ट्रेनर और जिम असिस्टेंट है | 28 वर्षीय अक्षय ठाकुर बिहार के रहने वाले हैं और वे बस में हेल्पर थे. उन्हें घटना के पांच दिन बाद 21 दिसंबर 2012 को बिहार से गिरफ़्तार किया गया था | अक्षय पर बलात्कार, हत्या और अपहरण के साथ ही घटना के बाद सबूत मिटाने की कोशिश करने का भी आरोप था | पेशे से फल बेचने वाले 19 साल के पवन गुप्ता ने अदालत में दावा किया था कि बलात्कार के समय वो बस में नहीं थे और विनय शर्मा के साथ संगीत कार्यक्रम सुनने गए हुए थे | छठा दोषी घटना के समय 17 साल का था इसलिए उस पर बतौर नाबालिग मुकदमा चलाया गया | 31 अगस्त 2013 को नाबलिग को बलात्कार और हत्या का दोषी पाया गया और उसे एक सुधार गृह में तीन साल की सज़ा हुई | भारतीय कानून के तहत किसी भी नाबालिग को दी जाने वाली ये सज़ा की सबसे ज़्यादा मियाद है | 
साकेत फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश योगेश खन्ना ने सजा सुनाते समय कहा था “इन अपराधियों ने क्रूरता की सारी सीमाएं तोड़ दीं | यह एक ऐसा अपराध है जिसने समाज को हिलाकर रख दिया है | ऐसे में अदालत आँख मूदें नहीं रह सकती | समाज में सख्त संदेश जाना जरूरी है | सरकारी वकील का कहना है कि “ये न्याय की मांग थी | न्याय में लोगों का विश्वास बढ़ा | भाई ने कहा कि नाबालिग के नाम पर जो बच गया, उसे भी फांसी की सजा मिले”| बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि “ ये झूठमेव जयते है |” 
हालांकि इस सजा से कई बहस के मुद्दों ने जन्म लिया है | पहला सवाल यह है कि जुवेनाईल एक्ट में बदलाव होना चाहिए या नहीं | अपराध के अनुसार सजा मिले या फिर उम्र के अनुसार चाहें अपराध कितना ही क्रूरतम क्यों न हो? दूसरा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि फांसी की सजा दे देने से क्या अपराध रुक जाएंगे और क्या हम हिंसक समाज नहीं बनते जा रहे हैं | अधिकतर देशों में फांसी की सजा प्रतिबंधित है | सवाल और भी कई हैं जिनका जवाब अभी भी बाँकी है | 



शुभम गुप्ता

No comments:

Post a Comment